भारत अपनी संस्कृति ,परम्परा एवं सर्व-धर्म-सम्भाव पर चलने वाला देश रहा है । हम विश्व के सभी धर्मो के साथ-साथ अपने बड़े-बुजुर्गो और असहाय लोगो की सेवा करना अपना कर्तव्य समझते है। लेकिन हमारी आस्था और श्रद्धा को किस प्रकार ये तथा कथित बाबा, दाई, मौलवी, पादरी, पाखण्डी धार्मिकता का चोला ओढ़े मूर्ख बना रहे है। इसकी बानगी एक बार फिर राधे माँ के रूप में सामने आई है। जनता को गुमराह करने वाले इन धंधेबाजों ने पूरे देश में लूट मचा रखी है। ये एकदम वेशधारी चमत्कार और हाईटेक प्रचार करके लोगों को अपने जाल में फांस लेते है और फिर शुरू होता है शोषण का सिलसिला।
दरअसल कारपोरेट फैक्ट्री की तरह यह भी एक व्यापार बन चुका है। कुछ बाबा कथावाचक इसको बड़े मैनेजमेन्ट की टीम के साथ इसका विस्तार करते है। ये तथाकथित बाबा बड़े.बड़े प्रचार तंत्र के बीच भेजते है। यही एजेन्ट ही बाबाओं के लिए भक्त अथवा ग्राहक उपलब्ध कराते है। लम्बे.लम्बे प्रवचन जिसमें त्याग एसमर्पणए निष्ठाए जागृतिए लोभए कामए मोक्ष आदि की बातकर एवं सम्मोहक क्रिया के सहारे उन पर अपना प्रभाव बनाते है। इनके इसी दिखावे के कारण भोले भाले लोग इनके झांसे में आ जाते हैं। फिर इस खेल का विस्तार आगे की टीम को करना होता है। जैसे. भगवान के अवतार में ही बाबाजीए गुरूजीए देवीमाँए आदि का अवतार बनाकर इनके चेले जो विशेष रंगों के वस्त्रों तथा भिन्न मुद्राओं में होते है। वह जनता के दिमाग में इतना भी देते है कि उन्हें ही दुनिया में सिर्फ असली भगवान उनके गुरूजी लगने लगते है। फिर कहा गया है कि ष्ष् तेरा तुझको अर्पणए क्या लागे मेराष्ष् इसी का सहारा लेकर ये बाबा जनता से उनका तन.मन.धन सबकुछ लेकर ऐश करते है। देखने सुनने में लगता है सांई जैसा समर्पण आज तक किसी ने नहीं दिखाया। संत की मूल पहचान उसकी सज्जनता होती थी। भारत भूमि ऐसे संतों से समद्ध रही है। जिनके दर्शनए सानिध्यए और आशीर्वाद हमारे लिए पथ प्रदर्शन करते थे। नीम करोरी बाबाए और पथिक जी महाराज जैसे न जाने कितने संत महात्मा हुए है। जिन्होनें जीवन में त्यागए समर्पणए प्रेम और उदारता की अनगिनत परिभाषाएँ गठित की थी। आज के तथाकथित संतए महात्माए कथावाचक हाईटेक सुविधाओं से लैस करोड़ों के एसी0 आश्रम में न केवल रहते है बल्कि पथ भ्रष्ट और चरित्र भ्रष्ट भी ळै। हरियाणा के रामपाल ने तो शासन.प्रशासन से ट़कराने के लिए पूरी फौज तक बना डाली थी। कई तथाकथित पाखण्डी श्वेत वेष में चिकने चुपड़े होकर भव्य और मंहगे वस्त्र धारण करके प्रवचन देते है। भीरू और भोली जनता उनके प्रभाव में तुरंत ही आ जाती है। आसाराम अज्ञैर नारायण सांई की असलियत तो सबके सामने आ ही गई है। इसी क्रम में आजकल राधे माँ भी चर्चा में है।
राधे मां का जन्म पंजाब के गुरदासपुर जिले के एक सिख परिवार में हुआ था। इनकी शादी पंजाब के ही रहने वाले व्यापारी सरदार मोहन सिंह से हुई। उन्होनें राधे मां की धार्मिक प्रतिभा को पहचाना। महंत रामदीन के प्रभाव में आने के बाद राधे मां की ख्याति बढ़ी। कथित रूप से वह लोगों की व्यक्तिगतए व्यापारिक और पारिवारिक समस्याओं को दूर करने लगी। देश में ये क्या हो रहा हैघ् संत महात्माओं का ज्ञान सदैव से समाज को दिशा दिखाता था लेकिन अब वे ऐययाशी और लूटकार की नई इबारत गढ़ रहे है। ऐसा क्यों हैघ्
संत परम्परा भारत के इतिहास से जुड़ी है एवं अनेकों युगों से चली आ रही है। परन्तु क्या आज कल के नौटंकीबाजों को आप संत मानेंगे। संतक कर्तव्य ही है समाज के लिए अपना निस्वार्थ समर्पण। लेकिन क्या आज के बाबाओं की तुलना उन संतों से करना ठीक होगाघ् जो स्वार्थ और आधुनिक व्यवस्थाओं से लैस है। अपने.अपने परिवार को भगवान के तुल्य बताकर अपनी ही पूजा कराने में लगे है जिनका मकसद सिर्फ धनए वैभव और अपना ही विकास करना है। दूसरों को त्याग और खुद शान.ओ.शौकत से जीवन का अवतार नहीं हो सकते। आखिर हमें और कितना शोषण करवाना पड़ेगाघ् हम ये कब समझेंगे कि ये बाबा वैरागी नहीं जल्लाद है जो अंधविश्वास के सहारे हमारा सब कुछ लिए जा रहे है। आज देखने तथा सुनने की और बोलने की भी जरूरत आ पड़ी है। हम लोगों को गुमराह करके करोड़ों.अरबों रूपये की दौलत जमा करनेए अपने परिवारों को विदेशों में पढ़ाने तथा ऐश कराने वाले ठग बाबाओं के विरूö एक आन्दोलन खड़ा कानून बनाकर सख्त कार्यवाही के साथ ही इनकी दौलत को देशाहत में लगाने की व्यवस्था को सुनिश्चित करे। ऐसा ना किया गया तो भारत के नाम पर एक ऐसा धब्बा लगायेंगे ये ठग बाबा जो भारतवासियों के लिए सबक होगा। चोरए डाकूए बलात्कारीए ठग एवं अंग प्रदर्शन में माहिर ये बाबा.दाई हमें यूं ही गुमराह करते रहेंगे। स्वाधीनता के बाद से ही क्या आम और क्या खास सभी ने सत्ता पर बैठे लोगों को प्रभावित करने का प्रयत्न किया हैं। लेकिन इन प्रयास में वे सफल होने की बजाय बदनाम ही अधिक हुए है।


दरअसल कारपोरेट फैक्ट्री की तरह यह भी एक व्यापार बन चुका है। कुछ बाबा कथावाचक इसको बड़े मैनेजमेन्ट की टीम के साथ इसका विस्तार करते है। ये तथाकथित बाबा बड़े.बड़े प्रचार तंत्र के बीच भेजते है। यही एजेन्ट ही बाबाओं के लिए भक्त अथवा ग्राहक उपलब्ध कराते है। लम्बे.लम्बे प्रवचन जिसमें त्याग एसमर्पणए निष्ठाए जागृतिए लोभए कामए मोक्ष आदि की बातकर एवं सम्मोहक क्रिया के सहारे उन पर अपना प्रभाव बनाते है। इनके इसी दिखावे के कारण भोले भाले लोग इनके झांसे में आ जाते हैं। फिर इस खेल का विस्तार आगे की टीम को करना होता है। जैसे. भगवान के अवतार में ही बाबाजीए गुरूजीए देवीमाँए आदि का अवतार बनाकर इनके चेले जो विशेष रंगों के वस्त्रों तथा भिन्न मुद्राओं में होते है। वह जनता के दिमाग में इतना भी देते है कि उन्हें ही दुनिया में सिर्फ असली भगवान उनके गुरूजी लगने लगते है। फिर कहा गया है कि ष्ष् तेरा तुझको अर्पणए क्या लागे मेराष्ष् इसी का सहारा लेकर ये बाबा जनता से उनका तन.मन.धन सबकुछ लेकर ऐश करते है। देखने सुनने में लगता है सांई जैसा समर्पण आज तक किसी ने नहीं दिखाया। संत की मूल पहचान उसकी सज्जनता होती थी। भारत भूमि ऐसे संतों से समद्ध रही है। जिनके दर्शनए सानिध्यए और आशीर्वाद हमारे लिए पथ प्रदर्शन करते थे। नीम करोरी बाबाए और पथिक जी महाराज जैसे न जाने कितने संत महात्मा हुए है। जिन्होनें जीवन में त्यागए समर्पणए प्रेम और उदारता की अनगिनत परिभाषाएँ गठित की थी। आज के तथाकथित संतए महात्माए कथावाचक हाईटेक सुविधाओं से लैस करोड़ों के एसी0 आश्रम में न केवल रहते है बल्कि पथ भ्रष्ट और चरित्र भ्रष्ट भी ळै। हरियाणा के रामपाल ने तो शासन.प्रशासन से ट़कराने के लिए पूरी फौज तक बना डाली थी। कई तथाकथित पाखण्डी श्वेत वेष में चिकने चुपड़े होकर भव्य और मंहगे वस्त्र धारण करके प्रवचन देते है। भीरू और भोली जनता उनके प्रभाव में तुरंत ही आ जाती है। आसाराम अज्ञैर नारायण सांई की असलियत तो सबके सामने आ ही गई है। इसी क्रम में आजकल राधे माँ भी चर्चा में है।
रेड रोज वाली राधे मां
लाखों का मेकअप करके भक्तों के बीच जाने वाली राधे मां का वैभव किसी फिल्म स्टार से कम नहीं उनके भक्त भी करोड़पति, अरबपति ही होते है। लेकिन समाचार चैनलों में उनके विवादित बोल प्रसारित होते ही उनकी भी असलियत सामने आ गयी। धन की लोलुपता के चलते राधे मां द्वारा नवविवाहित युवती को दहेज के लिए डराना धमकाना और मारना-पीटना भी अब किसी से छिपा नहीं है। पंजाब की रहने वाली राधे मां एक बार फिर विवादों में घिर गई है। हम आपको बताने जा रहे है राधे मां के बारे में वो सब कुछ जो जानना चाहते हैं आप। हमेशा मौन रहने वाली राधे मां के देशभर में लाखों भक्त है। यह अपने भक्तों को आशीर्वाद के रूप में रेड रोज देती है। राधे मां के लिए बड़े शहरों में जागरण का आयोजन किया जाता है। आयोजन में लाखों भक्त पहुंचते है। जाने- माने गायक इनकी श्रद्धा में भक्ति गीत गाते है। बड़े-बड़े सेलिब्रिटी का नाम आता है। इनमें पॉप सिंगर दलेर मंेहदी, भोजपुरी गायक हंसराज हंस, ऐड गुरू प्रहलाद कक्कड़ और ऑल इंडिया एंटी टेररिस्ट फं्रट के अध्यक्ष एमएस बिटटा आदि है।राधे मां का जन्म पंजाब के गुरदासपुर जिले के एक सिख परिवार में हुआ था। इनकी शादी पंजाब के ही रहने वाले व्यापारी सरदार मोहन सिंह से हुई। उन्होनें राधे मां की धार्मिक प्रतिभा को पहचाना। महंत रामदीन के प्रभाव में आने के बाद राधे मां की ख्याति बढ़ी। कथित रूप से वह लोगों की व्यक्तिगतए व्यापारिक और पारिवारिक समस्याओं को दूर करने लगी। देश में ये क्या हो रहा हैघ् संत महात्माओं का ज्ञान सदैव से समाज को दिशा दिखाता था लेकिन अब वे ऐययाशी और लूटकार की नई इबारत गढ़ रहे है। ऐसा क्यों हैघ्
संत परम्परा भारत के इतिहास से जुड़ी है एवं अनेकों युगों से चली आ रही है। परन्तु क्या आज कल के नौटंकीबाजों को आप संत मानेंगे। संतक कर्तव्य ही है समाज के लिए अपना निस्वार्थ समर्पण। लेकिन क्या आज के बाबाओं की तुलना उन संतों से करना ठीक होगाघ् जो स्वार्थ और आधुनिक व्यवस्थाओं से लैस है। अपने.अपने परिवार को भगवान के तुल्य बताकर अपनी ही पूजा कराने में लगे है जिनका मकसद सिर्फ धनए वैभव और अपना ही विकास करना है। दूसरों को त्याग और खुद शान.ओ.शौकत से जीवन का अवतार नहीं हो सकते। आखिर हमें और कितना शोषण करवाना पड़ेगाघ् हम ये कब समझेंगे कि ये बाबा वैरागी नहीं जल्लाद है जो अंधविश्वास के सहारे हमारा सब कुछ लिए जा रहे है। आज देखने तथा सुनने की और बोलने की भी जरूरत आ पड़ी है। हम लोगों को गुमराह करके करोड़ों.अरबों रूपये की दौलत जमा करनेए अपने परिवारों को विदेशों में पढ़ाने तथा ऐश कराने वाले ठग बाबाओं के विरूö एक आन्दोलन खड़ा कानून बनाकर सख्त कार्यवाही के साथ ही इनकी दौलत को देशाहत में लगाने की व्यवस्था को सुनिश्चित करे। ऐसा ना किया गया तो भारत के नाम पर एक ऐसा धब्बा लगायेंगे ये ठग बाबा जो भारतवासियों के लिए सबक होगा। चोरए डाकूए बलात्कारीए ठग एवं अंग प्रदर्शन में माहिर ये बाबा.दाई हमें यूं ही गुमराह करते रहेंगे। स्वाधीनता के बाद से ही क्या आम और क्या खास सभी ने सत्ता पर बैठे लोगों को प्रभावित करने का प्रयत्न किया हैं। लेकिन इन प्रयास में वे सफल होने की बजाय बदनाम ही अधिक हुए है।






