Tuesday, 5 November 2013

''रियलिटी शो का रियल चेहरा ''

       टीवी पर  आने वाले भिन भिन रियलिटी शो को देख कर  कई बार आपका भी  मन  ललचछता होगा और आप भी अपने  अंदर कोई  ना कोई टैलेंट ढूंढ़ने लग जाते होंगे ताकि आप भी टीवी कि दुनिया के चमकते सितारे बन सके आप तो फिर भी समझदार है , लेकिन जरा सोचिये उन बच्चो का क्या जिनके  बचपन  के साथ खिलवाड़ कर  रियलिटी  शो निर्माता  अपनी टीआरपी  बनाते है । पहेले बात युवाओ तक ही सिमित थी पर अब बच्चो को  भी अपने फायेदे के लिए प्रयोग करने  का सिलसिला शुरू हो चूका है । जिसमे बच्चे हँसते गाते कॉमेडी करते दिख जायेंगे , लेकिन शो कि ये रंगीन दुनिया  इतनी भी रंगीन नहीं  है , क्यूंकि वहा  बच्चो के सपने सजाये नहीं बल्कि तोड़े जाते है ॥ किसी टैलेंट शो मैं  अगर  बच्चे का चयन हो जाता है  तो  जाहिर तौर पर ये ख़ुशी कि बात है , लेकिन जब बच्चा असफल हो जाता है तो  एक तो वो पहेले से ही परेशान   हो जाता है ,,उसके ऊपर माता पिता का स्वभाव  उसे और दुखी करने  लगता है ।  घर  पर पड़ने वाली  डाट  का डर  उसे तंग  करने लगता है । घर और बहार , पडोसी और रिश्तेदार यहाँ तक कि परिवार वाले तक दूसरे बच्चो से उसकी तुलना करने लगते है , जिसकी वजह से  उसके अंदर हीन  भावना   घर कर जाती है । रिएलिटी  शो  मैं भाग सिर्फ इसलिए  लेना कि  जीतकर ही आना है व्यक्ति के मनोबल   को ऑडिसन  देने  से पहेले  तो मजबूत  करता है लेकिन अगर किसी कारण वश  उसे  हार का मुॅह  देखना पड़े  तो वही मनोबल धाराशयी  हो जाता है ।  बच्चा  भी  समझ  जाता होगा कि ऐसे  शो मैं भाग  ,लेकर  खुद को दूसरे बच्चो  से बेहतर  साबित करना कोई  बच्चो  का खेल नहीं है ,, इस हार  के  बाद उसका  बच्चपना तो उसका साथ छोड़ ही देता है , लेकिन  जीवन कि एक कड़वी सच्चाई से वो रूबरू हो  जाते है कि आपकी खुशियाँ  आपके सपने बस जजिस  के एक हां  और ना  पर ही टिके है ॥॥॥ 

अकेले हनी सिंह ही दोषी क्यों !!!



            आज कि फिल्मी दुनिया बिना गानो के ऐसी लगेगी जैसे बिना रस के आम। ....... जरा सोचिये अगर हमारी फिल्मे बिना गानो के बनने लगे तो ,उनमे सिर्फ ड्रामा के अलावा कुछ न हो तो। .... कैसा लगेगा ????
      हमारे फ़िल्म  इंडस्ट्री मैं कई ऐसे बेहतरीन गायक मौजूद है ,जिनके कारण हमें बढ़िया से बढ़िया गाने सुनने को मिलते है। उन्ही मैं से एक है मशहूर पंजाबी पॉप गायक हनी सिंह जिन्हे हाल के अरसे  मैं खूब कोसा गया था ,ये कहकर के उनके गाये अश्लील गाने भारतीय संस्कृति को ख़राब कर रहे है ।
                       मैं कहती  हूँ ,, पिछले कुछ सालों  से क्या हमारे समाज और सरकार ने कानो मैं रुई ठूस रखी थी , जो उन्हें अब तक ये नही दिखायी दे रहा था और अब अचानक ही उन्हें भातीय संस्कृति कि इतनी फिर्क होने लगी है । अभी  तक तो वो खुद हनी सिंह के गाये गाने बड़े मज़े से सुना करते थे । आज कल तो हर समाचार चैनलो पर गली नुक्कड़ मैं समाज को बदलने कि बात कि जा रही है ,,पर कोई ये नहीं बता पा रहा है के ये बदलाव आयेगा कैसे । समाज मैं एक तरफ तो युवा पीढ़ी दिल्ली सहित पुरे देश मैं  दुस्कर्म कि शिकार पीड़िता के पक्ष मैं रैलियाँ  निकाल रहे थे , वही दूसरी ओर वही युवा हनी सिंह के गाने  YOUTUBE पर १०  लाख से  ज्यादा बार देख रहे थे । TWITTER पर हनी के फोल्लोवेर्स  कि सख्या  ५०,००० को पर कर रही है , और FACEBOOK पर हनी कि फरंडलिस्ट लगातार लम्बी हो रही है । तो ऐसे मैं हम अकेले हनी सिंह को ही दोषी नहीं मान सकते ना ॥ 
                         हमारी युवा पीढ़ी ही जब हनी सिंह के गाये  गानो को अश्लील और आपत्तीजनक ना  मान कर उसका मज़ा ले रही हो । साफ़ हैं कि अगर हनी इसके लिए दोषी है तो उनके गाये गानो का लुफ्त लेने वाली हमारी समाज भी उतनी ही दोषी है । हनी सिंह को दोष देने से पहेले हमे ये बात समझनी होगी के अगर ऐसे गाने गाना गुनाह है तो इन्हे सुनना भी उससे कम बड़ा गुनाह नहीं है , और रही बात हनी सिंह पर लगे बैन  कि तो हां सरकार ने उसपर बैन लगाया है ,पर उन लोगो का क्या जो बड़े से बड़े गुनाह करते जाते है , और सरकार सिर्फ  देखने के अलावा कुछ भी नहीं कर पाती है ॥॥॥ 

Saturday, 26 January 2013

'' आज़ादी के नाम पर धब्बा ''

 कहते वक़्त अच्छा  तो नहीं लग रहा है  पर अफ़सोस ये सच है , आज हमारा देश  आजादी का 64वा  साल मना रहा है ,64 सालो मै  हमारे देश मै  बहुत कुछ बदल गया है , नहीं बदली है तो सिर्फ एक चीज़  और वो है समाज मै औरतो की जगह  , पहेले की तरह आज भी समाज  मै  ज्यादातर औरतो की जगह वो नहीं है जो उन्हें मिलनी चाहिए , आज भी उनकी इज्ज़त , आबरू से खिलवाड़ किया जाता है  , अब तो हालत इस कदर बिगड़ गये है  के महिलाये  खुद को ही सुरक्षित  महसूस नहीं कर पा  रही है ,  उन्हें ये बिलकुल समझ नहीं आ रहा है के किस पर भरोसा किया जाये  और किस पर नहीं , आखिर ऐसा क्यों हो रहा है , क्यों हमारे देश  मै आज भी औरतो को  वो अधिकार  नहीं दिया  जाता  जो उन्हें मिलना चाहिए , और जो उनका हक है , औरतो  से बदसलूकी और उनकी आबरू से खिलवाड़ करने वाले  आरोपियों  को क्यों सरकार तुरंत फासी  की सजा नहीं देती  ,  मेरे हिसाब से सरकार को महिलायों की सुरक्षा  के लिए कड़े नियम लागू करने चाहिए  ताकि महिलाये अपने आप को इस देश मैं  सुरक्षित  महसूस करे . क्यूकि  महिलायों  के बिना  दुनिया कैसी होगी ?  ये सोच के ही डर  लगने लगा ना , इसलिए  अब हमें ये खुद ही सोचना  चाहिए  के हमे क्या करना है , महिलायों को सुरक्षित महसूस करवाना है  या उनके बिना जीने की आदत  डालनी है