ज़िन्दगी में कुछ लम्हें ऐसे होते हैं जो हमेशा हमारी यादों मैं ताज़ा रहते हैं ,चाहें वो अच्छे हो या बुरे !
फर्क बस इतना हैं की बुरी यादों मै हम जीना नही चाहते और अच्छी यादों को हम अपने आप से दूर नहीं करना चाहते । यादों का सिलसिला तो बचपन से ही शुरू हो जाता हैं। खेलते खेलते गिरने के निशानों लेकर पहली बार खाना बनाने तक की यादें........माँ की उंगली पकड़कर स्कूल के अंदर वो पहला कदम हो या कॉलेज का पहला दिन.…… बीमार पड़ने पर मां से मिला लाड़ हो या कुछ गलत करने पर पापा से पड़ी डाट ......…इन सबकी जीवन मैं अपनी अलग़ ही जगह हैं । बचपन से लेकर जवानी तक के सफ़र मैं हर दिन कुछ खास रहा , ज़िन्दगी की किताब मैं हर एक दिन एक नया पन्ना जुड़ता हैं और हर पन्ना ज़िन्दगी के नए पहलू को दर्शाता हैं ……… हम कितने भी आगे क्यों ना चले जाये ,लौट कर वो बचपन के दिन जरूर याद आते हैं सबको, वो घर के आँगन मैं खेलना …… माँ का खाना लेकर पीछे पीछे दौड़ना और पकड़ कर गोद मैं बिठाकर खिलाना ....... पापा के घर लौटने पर उनकी जेब देखना आज चॉकलेट लाये कि नहीं ....... वो पहली दोस्त जिसके साथ अपनी हर छोटी सी छोटी बात शेयर की,फिर हर छोटी बात पर लड़ना , पल भर रोना फिर मीठी सी मुस्कान का लौट आना , कितना हसीन था वो बचपन जब स्कूल की मस्ती ………दोस्तों के साथ लंच शेयर करना ……… टीचर की डाट पर आंसू आ जाना और दोस्तों का आंसू पोंछ कर ये कहना हम पूरा कर देंगे तेरा वर्क और फिर मस्त होकर खेलना ....... एक ही कलर का ड्रेस पहेन कर हम लगते थे कितने अच्छे , स्कूल लगता था पोल्ट्री फार्म और हम सब मुर्ग़ी के बच्चे .......मुझको समझ न आया आज तक टीचर का यह फंडा , हमे बना देती थी मुर्ग़ा और खुद कॉपी पे देती थी अंडा ....... जब बचपन था , तो जवानी एक सपना था , जब जवान हुए , तो बचपन एक ज़माना था ……जब घर मैं रहते थे , तो आज़ादी अच्छी लगती थी , आज आज़ादी है ,फिर भी घर जाने की जल्दी रहती है…… स्कूल मैं जिनके साथ झगड़ते थे ,, आज उनको ही इंटरनेट पर तलाशते हैं ……वो नीम का पेड़ जिसने हमारे बचपन को छाव दी .……वो हर याद जो हमारे बचपन से जुडी हैं , हमारे दिल के बहुत करीब हैं ......... और आखिरी सांस तक रहेगी । वो खट्टी मीठी यादें ही हमारे अस्तित्व की पहचान है …… और अब जब किसी मासूम बच्चे को देखते है हम तो वो यादें हमे वहीं लेकर चली जाती है , जहां से हमने शुरूआत की थी ॥
ख़ुशी किस्में होती हैं , ये पता अब चला है ………बचपन क्या था , इसका एहसास अब हुआ है ……… काश बदल सकते हम ज़िन्दगी के कुछ साल , काश ! जी सकते हम ज़िन्दगी फिर से एक बार ..........॥॥