'' आज़ादी के नाम पर धब्बा ''
कहते वक़्त अच्छा तो नहीं लग रहा है पर अफ़सोस ये सच है , आज हमारा देश आजादी का 64वा साल मना रहा है ,64 सालो मै हमारे देश मै बहुत कुछ बदल गया है , नहीं बदली है तो सिर्फ एक चीज़ और वो है समाज मै औरतो की जगह , पहेले की तरह आज भी समाज मै ज्यादातर औरतो की जगह वो नहीं है जो उन्हें मिलनी चाहिए , आज भी उनकी इज्ज़त , आबरू से खिलवाड़ किया जाता है , अब तो हालत इस कदर बिगड़ गये है के महिलाये खुद को ही सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही है , उन्हें ये बिलकुल समझ नहीं आ रहा है के किस पर भरोसा किया जाये और किस पर नहीं , आखिर ऐसा क्यों हो रहा है , क्यों हमारे देश मै आज भी औरतो को वो अधिकार नहीं दिया जाता जो उन्हें मिलना चाहिए , और जो उनका हक है , औरतो से बदसलूकी और उनकी आबरू से खिलवाड़ करने वाले आरोपियों को क्यों सरकार तुरंत फासी की सजा नहीं देती , मेरे हिसाब से सरकार को महिलायों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम लागू करने चाहिए ताकि महिलाये अपने आप को इस देश मैं सुरक्षित महसूस करे . क्यूकि महिलायों के बिना दुनिया कैसी होगी ? ये सोच के ही डर लगने लगा ना , इसलिए अब हमें ये खुद ही सोचना चाहिए के हमे क्या करना है , महिलायों को सुरक्षित महसूस करवाना है या उनके बिना जीने की आदत डालनी है
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