Saturday, 26 January 2013

'' आज़ादी के नाम पर धब्बा ''

 कहते वक़्त अच्छा  तो नहीं लग रहा है  पर अफ़सोस ये सच है , आज हमारा देश  आजादी का 64वा  साल मना रहा है ,64 सालो मै  हमारे देश मै  बहुत कुछ बदल गया है , नहीं बदली है तो सिर्फ एक चीज़  और वो है समाज मै औरतो की जगह  , पहेले की तरह आज भी समाज  मै  ज्यादातर औरतो की जगह वो नहीं है जो उन्हें मिलनी चाहिए , आज भी उनकी इज्ज़त , आबरू से खिलवाड़ किया जाता है  , अब तो हालत इस कदर बिगड़ गये है  के महिलाये  खुद को ही सुरक्षित  महसूस नहीं कर पा  रही है ,  उन्हें ये बिलकुल समझ नहीं आ रहा है के किस पर भरोसा किया जाये  और किस पर नहीं , आखिर ऐसा क्यों हो रहा है , क्यों हमारे देश  मै आज भी औरतो को  वो अधिकार  नहीं दिया  जाता  जो उन्हें मिलना चाहिए , और जो उनका हक है , औरतो  से बदसलूकी और उनकी आबरू से खिलवाड़ करने वाले  आरोपियों  को क्यों सरकार तुरंत फासी  की सजा नहीं देती  ,  मेरे हिसाब से सरकार को महिलायों की सुरक्षा  के लिए कड़े नियम लागू करने चाहिए  ताकि महिलाये अपने आप को इस देश मैं  सुरक्षित  महसूस करे . क्यूकि  महिलायों  के बिना  दुनिया कैसी होगी ?  ये सोच के ही डर  लगने लगा ना , इसलिए  अब हमें ये खुद ही सोचना  चाहिए  के हमे क्या करना है , महिलायों को सुरक्षित महसूस करवाना है  या उनके बिना जीने की आदत  डालनी है


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